Wednesday, January 6, 2010

नायगरा

सदियोंसे बहते हुए नायगारा को जब मैं
तुम्हारे हाथों में हाथ थामे देखूंगा
तो एक पल के लिए सबकुछ भूल जाऊंगा

भूल जाउंगा के अब बस कुछ ही साल बाकी हैं
हमें बूढे होने में

भूल जाउंगा के बस कुछ ही साल पहले तो
हम आये हैं इस दुनिया में

भूल जाउंगा वो दोस्त जो कभी अपनोंसें भी
अपने लगते थे
और अब पराए भी नही लगते

भूल जाउंगा के मार्केट कभी भी गिर सकता हैं
और रेसेशन अब भी बाकी है

भूल जाउंगा के माँ के घुटनों में अभीभी दर्द हैं
और पिताजी मुझे वापस बुला रहे हैं

भूल जाउंगा के इस महिने का पानी का बिल मैने
अभीतक भरा नही हैं

भूल जाउंगा के हमारी गिलहरी आजकल मेरे बुलानेसे
पास नही आती

भूल जाउंगा के सारे सवालोंका जवाब मिले बिना ही
इस दुनिया से जाना हैं

भूल जाउंगा के मंजर कुछ अलग होता अगर कुछ रिश्ते बनते
और कुछ बिगडते

भूल जाउंगा सब कुछ सिवाय इसके के
हजारों मैल दूर कहीं पैदा हुवी वो बूंदें
खुद को झोंक देती हैं बिना कुछ सोचे,समझें
उस सफ़ेद पानी के तेज बहाव में

उन्ही बूंदों को साक्षी मान कर मैं वो पल जी लूंगा
तुम्हारे साथ, खुद के साथ
जब मैं सदियोंसे बहते हुए नायगारा को
तुम्हारे हाथों में हाथ थामे देखूंगा