घुट घुट के मर रहे थे, इक घूंट ने पीना सिखा दिया
हां सच है हमे शराब ने जीना सिखा दिया
क्यूं सफ़ेद चांद के है आज हर गली में चर्चे?
कल सुनहरी चांदनीने मेरे पैमानोंको छू दिया
कभी मिलना था खुद से यूं के खुदा भी ना याद आए
मैखाने में खुदीने खुद खुदासे मिला दिया
कहां खत्म होते है ये हसरतोंके सिलसिलें?
बस एक जाम ने हर हसरत को मिटा दिया
हसने को तो हमभी हसते है ए सनम
वो एक शाम थी जिसने हमे रोना सिखा दिया
Wednesday, April 29, 2009
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6 comments:
Awesome...!!
wah....wah..........
ekdum jhakas ....
too good!!
SubhanAlla
brilliant yaar :) !! "कभी मिलना था खुद से यूं के खुदा भी ना याद आए
मैखाने में खुदीने खुद खुदासे मिला दिया" .. superb !!
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